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मातासंस्कारमाँ

हमारी माँ: हमारे करियर निर्माण की मुख्य शिल्पकार

August 14, 2025·4 min read·

यह लेख एक मां के उस अमूल्य योगदान को समर्पित है, जिसने अपने बच्चों के करियर और व्यक्तित्व को संवारा। शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा, भाषा कौशल, स्वावलंबन और दूरदर्शिता के माध्यम से उन्होंने अपने बच्चों को सफल उद्यमी और अधिकारी बनाया। यह कहानी मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प की अद्भुत मिसाल है।

भारतीय पारिवारिक व्यवस्था में आमतौर पर यह देखा जाता है कि माता-पिता की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। जहाँ माताएं बच्चों को संस्कार देने और जीवन मूल्यों को स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं, वहीं पिता करियर विकास और व्यावसायिक मार्गदर्शन में सहायता करते हैं। लेकिन हमारे घर में स्थिति कुछ अलग थी। यहाँ हमारे पिताजी ने हमें जीवन जीने के सही तरीके और मानवीय मूल्य सिखाए, जबकि हमारी माताजी ने हमारे करियर डेवलपमेंट में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हम तीन भाई-बहन हैं—दो भाई और एक बहन। हमारी माताजी का हमारे करियर विकास में जो अमूल्य योगदान रहा है, उसे शब्दों में व्यक्त करना वास्तव में एक चुनौती है। उनके द्वारा किए गए प्रयासों और दिए गए मार्गदर्शन का यह एक विनम्र प्रयास है जिसके माध्यम से मैं उनके योगदान को रेखांकित करना चाहता हूं।

शिक्षा के प्रति अटूट निष्ठा

हमारी माताजी का शिक्षा के प्रति समर्पण अनुकरणीय था। शादी के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे नियमित कॉलेज में जाकर बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस की डिग्री प्राप्त की और अंततः स्नातकोत्तर भी पूरा किया। उनके इस संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने हमें शिक्षा की वास्तविक महत्ता और उसके लिए आवश्यक लगन का पाठ पढ़ाया।

भाषा कौशल का विकास

हमारी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश में हिंदी माध्यम से हुई थी। लेकिन माताजी की दूरदर्शिता ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि करियर के विकास में अंग्रेजी भाषा का महत्व कितना अधिक है। इसलिए उन्होंने हमें बचपन से ही प्रतिदिन पांच नए अंग्रेजी शब्द सीखने और उनका व्यावहारिक प्रयोग करने की आदत डलवाई। हमारी अंग्रेजी को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने नागपुर से अंग्रेजी समाचार पत्र का सब्सक्रिप्शन लगवाया, जो एक दिन की देरी से हमारे शहर पहुंचता था।

पठन-पाठन की संस्कृति

माताजी अच्छी तरह समझती थीं कि उत्कृष्ट पठन-पाठन और सुंदर हस्तलेखन का व्यक्तित्व विकास में कितना महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए उन्होंने पुस्तकालय की सदस्यता दिलवाकर हमें नियमित अध्ययन की आदत डलवाई। साथ ही उन्होंने हमें सुंदर हस्तलेखन भी सिखाया। हमारे सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए उन्होंने रेडियो पर अंग्रेजी समाचारों को सुनने की आदत डलवाई। उनकी इन्हीं दूरदर्शितापूर्ण पहलों के कारण मैं बी.ई., एम.ई., और पीएच.डी. करके अपने करियर में एक सम्मानजनक स्थान हासिल कर सका।

दृढ़ संकल्प और सफलता की कहानी

मेरा छोटा भाई अत्यधिक प्रतिभाशाली होने के बावजूद भी प्रारंभिक दौर में पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाया। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद उसे सरकारी नौकरी मिल गई। लेकिन माताजी डिप्लोमा की सीमाओं को समझती थीं। उन्हें पूरा विश्वास था कि केवल डिप्लोमा से करियर का समुचित विकास संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने छोटे भाई पर दबाव डाला कि वह शादी के बाद भी पार्ट टाइम बी.ई. करे और एमबीए भी पूरा करे। उनके इस दृढ़ संकल्प का परिणाम आज दिखाई दे रहा है - मेरा छोटा भाई केंद्र सरकार की एक प्रतिष्ठित कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत है।

स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की शिक्षा

एक समय पिताजी की नौकरी के कारण मेरा छोटा भाई और बहन दूसरे शहर में रहते थे। छुट्टियों में जब वे घर आते थे, तो माताजी ने दोनों को एक साथ यात्रा न करने की हिदायत दी। उनका मानना था कि बहन को अकेले समाज का सामना करना सीखना चाहिए। इसलिए दोनों अलग-अलग गाड़ियों से घर आया करते थे। माताजी की इस दूरदर्शी सोच का परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। हमारी छोटी बहन आज एक सफल उद्यमी है, जो व्यावसायिक कार्यों के सिलसिले में देश-विदेश में अकेले यात्रा करने का साहस रखती है। उसमें जो आत्मविश्वास और निडरता दिखाई देती है, वह निश्चित रूप से माताजी की शिक्षाओं का ही परिणाम है।

निष्कर्ष

महत्वाकांक्षा के बीज सही उम्र में डालना आगे के जीवन की दिशा निर्धारित करती है। हमारी मां ने अपनी स्वयं की शिक्षा और सूझ बूझ का पूरा उपयोग इन बीजों का सही रोपण किया। शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित न रखते हुए जीवन जीने की कला भी हमने मां से सीखी। संगीत, लेखन, यात्रायें, राजनीति, खेल सब में टूट कर रुचि यह भी हमें हमारी माँ से प्राप्त हुई। ईश्वर पर श्रद्धा रखकर, बुरे वक़्त में भी सुदृढ़ रहना आदि उनके शिक्षा के अलावा मां के स्वभाव के पहलू रहे हैं, जो हम सब ने अपने आप आत्मसात कर लिए , बिना किसी अतिरिक्त प्रयासों के।

आज जब हम अपनी उपलब्धियों को देखते हैं, तो स्पष्ट रूप से महसूस करते हैं कि यह सब माताजी के अथक प्रयासों, सही मार्गदर्शन और पिताजी ने हमें जीवन जीने के सही तरीके और मानवीय मूल्य सिखाए उसका ही परिणाम है।