पति पत्नी
मेरा अपना मानना है कि पति पत्नी के संबंध शरीर संपर्क सहित प्रेम से शरीर संपर्क रहित प्रेम का एक निरंतर प्रवास है । इसका पहला पड़ाव जब पत्नी माँ बनती है तब आता है, और उसके बाद के पड़ाव हमारे आचरण और विचार तय करते हैं, अंतिम पड़ाव शरीर संपर्क रहित प्रेम ही है ।
पति पत्नी कहते ही हमारे सामने दो चित्र आते है। पहला हाथों में हाथ लिए फुटपाथ, मॉल, पर्यटन स्थलों पर घूमते युवा दम्पत्ति या समाज माध्यमों, कवि सम्मेलनों मैं पति पत्नी पर कहे गए चुटकुले । ये दोनों ही इस रिश्ते की सतही अभिव्यक्ति हैं या हल्का पहलू।
प्रसिद्ध विचारक खलील जिब्रान ने कहा कि पति पत्नी के संबंध वीणा के तार की तरह होते उनका तनाव अलग-अलग होता है । लेकिन इसी वजह से वीणा का मधुर संगीत जन्म लेता । इसके मायने यह हुए कि पति-पत्नी में एक दूसरे में समाने या समान होने की आवश्यकता नहीं है। अपितु अपने व्यक्तित्व की विभिन्नता से नित नया जीवन संगीत सृजित करना और समाज को अधिक परिष्कृत बनाना है ।
उन्होंने पति-पत्नी के संबंध की तुलना मंदिर के स्तंभों से भी की है। अगर अंतर ज्यादा हो तो मन्दिर की छत गिरने की आशंका है और अगर अंतर कम हो तो अन्य व्यक्तियों /व्यक्तित्व को आने जाने की जगह नहीं रहेगी ।
पति पत्नी के संबंध की तुलना मंदिर से कर उन्होंने ना सिर्फ इसकी पवित्रता परिभाषित की है, अपितु, अच्छे संबंधों की समाज की आवश्यकता भी प्रतिपादित की है । उपरोक्त परिभाषा पति-पत्नी के संबंधों की यात्रा का परम उच्चांक है।
मेरा अपना मानना है कि पति पत्नी के संबंध शरीर संपर्क सहित प्रेम से शरीर संपर्क रहित प्रेम का एक निरंतर प्रवास है । इसका पहला पड़ाव जब पत्नी माँ बनती है तब आता है, और उसके बाद के पड़ाव हमारे आचरण और विचार तय करते हैं, अंतिम पड़ाव शरीर संपर्क रहित प्रेम ही है ।
लगभग 30 साल के वैवाहिक जीवन के बाद जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ और पति पत्नी के संबंध को समझने की कोशिश करता हूँ, तो लगता है उपरोक्त विचार काफी हद तक पति पत्नी के संबंधों को समझने में सहायक होते हैं । यह बात हमारी पीढ़ी के लिए ज़्यादा लागू हो सकती है।
किंतु जब हम आज के युवा पीढ़ी के वैवाहिक जीवन की ओर या पति पत्नी के रिश्ते की ओर दिखते है, तो ये महसूस होता है कि उन्होंने पति पत्नी के स्वतंत्र व्यक्तित्व को ज़्यादा अच्छे से समझा और साकार करने की कोशिश की है । परिवार और वैवाहिक संस्था को नई ऊँचाई और पहचान देने की कोशिश की है। आज के युवा पति-पत्नी जिम्मेदारी को बेहतर तरीके से समझने और बांटने की कोशिश करते नज़र आते हैं। वे एक दूसरे की प्रतिभा, मर्यादा, और समय का आदर करने के लिए निरंतर प्रयत्नशील दिखते हैं।
जब हम नई पीढ़ी के परिपेक्ष्य में पति पत्नी के संबंध का विचार करते हैं तो मुझे ऐसा लगता है पति पत्नी बनने से पहले की प्रक्रिया का भी विचार होना चाहिए । आज की पीढ़ी इस रिश्ते की शुरुआत से पहले यह जानने की कोशिश करती है, कि क्या हम खलील जिब्रान ने बताए परिभाषा को निभा सकने के लिए क्वालिफाइड हैं । इसके लिए वे आज उपस्थित पर्याय जैसे लव मैरिज, लिव इन रिलेशनशिप, डेटिंग इत्यादि का इस्तेमाल करते नजर आते हैं । लंबे रिश्ते की शुरुआत परख करना कोई गैर नहीं । शर्त है इन पर्यायों का उपयोग पवित्र उद्देश्य से किया जाए।
उपरोक्त पर्याय पति-पत्नी के रिश्ते में compatibility (जैसे स्वभाव , विचार , आदतें इत्यादि) और rationality (तर्कसंगतता) खोजने में मदद करते हैं। लेकिन हमें यह हर दम समझना चाहिए या ध्यान में रखना चाहिए कि इस रिश्ते में थोड़ी irrationality और unpredictability इसे अधिक मानवीय स्पर्श देती है। ठीक वैसे ही जैसे गुलजार की निम्नलिखित पंक्तियाँ
हमने देखी है उन आँखों की महकती खुशबू
ये पंक्तियाँ भले ही irrational लगें, लेकिन यही इसकी खूबसूरती है। ठीक इसी प्रकार पति पत्नी का रिश्ता भी आँखों की महकती खुशबू जैसा है । इस डेटा ड्रिवन प्रेडिक्टेबल सोसायटी की दुनिया में unpredictability की खुशबू लिए फलता फूलता चंद काँटों के साथ।
आज की तेजी से बदलती दुनिया में प्रैक्टिस करना अत्यंत कठिन है। ऐसे समय में परिवार के वरिष्ठ सदस्य, जिन्हें वैवाहिक जीवन का ज्यादा अनुभव है, उन्होंने नई पीढ़ी को विवाह संस्था की वैल्यू और प्रैक्टिकलिटी का उचित संगम स्थापित करने में मदद करने की जरूरत है ।
पति-पत्नी या विवाह संस्था समय के साथ-साथ बदलना आवश्यक भी है और इतिहास इसका गवाह भी है। समय के साथ-साथ पति पत्नी के संबंध की परिभाषा, जिम्मेदारियों स्वयं की ओर, परिवार की ओर, समाज की ओर बदल सकती है । लेकिन प्रेम जो पति पत्नी के बीच होता है, उसे निरंतर एक दूसरे के प्रति विश्वास और समर्पण से अधिक मजबूत तथा जीवनोपयोगी करने की आवश्यकता है । ताकि पति-पत्नी का रिश्ता और वैवाहिक संस्था को नई ऊँचाई और पहचान प्राप्त हो सके ।
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